खिलते चमकते दियों की रोशनी में जगमग इस शाम को आज रंगीन कर लेते हैं... हम भी हिस्सा हैं इस कायनात का, आओ मिल कर इस जहां को हसीं कर देते हैं।
गर है सच्ची इबादत तो दुआ कबूल होगी तेरी उस दरबार में, पहले उस माँ सर्वेश्वरी पर यकीन तो कर लेते हैं... अंधेरों को काट, रोशनी भर, आत्मविश्वास की अलख जगा... जोगी है जो मन, 'औघड़ बाबा कहलन' को अंतर्लीन कर लेते हैं।
- Vijay Yadav "एक रमता फ़कीर"
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